लालिहारण
जब राधा रानी ने अपने रोम-रोम पर लिखवाया श्याम का नाम: एक अद्भुत प्रेम लीला 🌸💙
लालिहारण
एक बार की बात है, जब किशोरी जी को यह भान हुआ कि उनके प्राणप्रिय श्यामसुंदर पूरे गोकुल में 'माखन चोर' के नाम से प्रसिद्ध हैं, तो उन्हें बड़ा संकोच हुआ। उन्होंने ठाकुर जी से कई बार आग्रह किया कि वे यह चोरी की आदत छोड़ दें।
परन्तु, जो अपनी मैया यशोदा की नहीं सुनते, वे भला अपनी प्रियतमा की भी कहाँ सुनने वाले थे! ठाकुर जी ने अपनी माखन चोरी की मधुर लीला जारी रखी।
अंततः, ठाकुर जी को सबक सिखाने के लिए स्वामिनी श्री राधा रानी उनसे रूठ गईं। कई दिन बीत गए, न वे कृष्ण से मिलने आईं और न ही कोई संदेश भेजा। जब व्याकुल होकर श्यामसुंदर उन्हें मनाने बरसानें पहुंचे, तो वहाँ भी उन्हें दर्शन दुर्लभ हो गए।
अब अपनी रूठी राधा को मनाने के लिए लीलाधर ने एक अद्भुत लीला रची।
ब्रज में गोदना (टैटू) बनाने वाली स्त्री को 'लालिहारण' कहा जाता है। श्यामसुंदर ने झटपट एक लालिहारण का भेष धारण किया, सिर पर घूंघट ओढ़ा और बरसाने की गलियों में पुकार लगाने लगे:
🎶 "मै दूर गाँव से आई हूँ, देख तुम्हारी ऊंची अटारी,
दीदार की मैं प्यासी, दर्शन दो वृषभानु दुलारी।
हाथ जोड़ विनंती करूँ, अर्ज मान लो हमारी,
आपकी गलिन गुहार करूँ, लील्या गुदवा लो प्यारी।।" 🎶
किशोरी जी ने जब यह मीठी पुकार सुनी, तो उन्होंने विशाखा सखी को भेजकर उस लालिहारण को अपनी अटरिया पर बुलवा लिया।
घूंघट में अपना साँंवरा मुख छिपाए, ठाकुर जी किशोरी जी के समक्ष पहुंचे। उन्होंने बड़े प्रेम से राधा रानी का सुकोमल हाथ पकड़ा और अपनी आवाज बदल कर बोले, "कहो सुकुमारी! तुम्हारे हाथ पर किसका नाम लिखूँ?"
किशोरी जी ने जो उत्तर दिया, वह प्रेम की पराकाष्ठा थी। वे बोलीं, "अरी लालिहारण! केवल हाथ पर नहीं, मुझे तो अपने पूरे श्री अंग पर अपने प्रियतम का नाम गुदवाना है।"
और फिर, श्री राधा रानी ने बताया कि कहाँ-कहाँ, क्या-क्या लिखना है:
🌸 माथे पे 'मदन मोहन', पलकों पे 'पीताम्बर धारी'
🌸 नासिका पे 'नटवर', कपोलों पे 'कृष्ण मुरारी'
🌸 अधरों पे 'अच्युत', गर्दन पे 'गोवर्धन धारी'
🌸 कानों में 'केशव', भृकुटी पे 'चार भुजा धारी'
🌸 छाती पे 'छलिया', और कमर पे 'कन्हैया'
🌸 जंघाओं पे 'जनार्दन', उदर पे 'ऊखल बंधैया'
🌸 भुजाओं पे लिख 'बनवारी', हथेली पे 'हलधर के भैया'
🌸 नखों पे लिख 'नारायण', पैरों पे 'जग पालनहारी'
🌸 चरणों में 'चोर चित का', मन में 'मोर मुकुट धारी'
🌸 नैनों में तू गोद दे, 'नंदनंदन' की सूरत प्यारी
🌸 और रोम-रोम पे लिख दे मेरे, 'रसिया रास बिहारी'.....
जब ठाकुर जी ने अपने ही मुख से सुना कि उनकी आराध्या अपने रोम-रोम पर केवल उन्हीं का नाम अंकित करवाना चाहती हैं, तो वे प्रेम के अतिरेक में अपनी सुध-बुध खो बैठे। वे भूल गए कि वे लालिहारण के वेश में हैं और आनंद में भरकर वहीं खड़े होकर नृत्य करने लगे।
किशोरी जी आश्चर्यचकित थीं कि इस लालिहारण को अचानक क्या हो गया!
...और तभी नृत्य करते हुए श्यामसुंदर का घूंघट गिर गया! पास खड़ी ललिता सखी ने जैसे ही वह साँवरी सूरत देखी, वे जोर से बोल उठीं, "अरे... ये कोई लालिहारण नहीं, ये तो स्वयं बाँके बिहारी हैं!"
अपने प्रेम के इस खुले इज़हार पर किशोरी जी लज्जा से लाल हो गईं। अब उनके पास अपने कन्हैया को क्षमा करने के अलावा कोई विकल्प न था।
ठाकुर जी भी किशोरी जी का अपने प्रति ऐसा अपार और निश्छल प्रेम देखकर गदगद् हो गए और दोनों की आँखों से प्रेमाश्रु बह निकले।
प्रेम की ऐसी पराकाष्ठा को कोटि-कोटि नमन! 🙌
जय जय श्री राधे! ❤️🙏
लाडली लाल की जय! ❤️🙏
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