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Showing posts from November, 2025

जामवन्त जी आज भी जिंदा हैं,

जामवन्त जी आज भी जिंदा हैं, जानिए उनके जीवन का !!! जामवन्त जी को ऋक्षपति कहा जाता है। यह ऋक्ष बिगड़कर रीछ हो गया जिसका अर्थ होता है भालू अर्थात भालू के राजा। लेकिन क्या वे सचमुच भालू मानव थे? रामायण आदि ग्रंथों में तो उनका चित्रण ऐसा ही किया गया है। ऋक्ष शब्द संस्कृत के अंतरिक्ष शब्द से निकला है।  दरअसल दुनियाभर की पौराणिक कथाओं में इस तरामंडल को अलग-अलग नाम से पुकारा जाता है, लेकिन सप्तऋषि तारामंडल मंडल को यूनान में बड़ा भालू (larger bear) कहा जाता है। इस तरामंडल के संबंध में प्राचीन भारत और यूनान में कई दंतकथाएं प्राचलित हैं।   पुराणों के अध्ययन से पता चलता है कि वशिष्ठ, अत्रि, विश्वामित्र, दुर्वासा, अश्वत्थामा, राजा बलि, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य, परशुराम, मार्कण्डेय ऋषि, वेद व्यास और जामवन्त आदि कई ऋषि, मुनि और देवता सशरीर आज भी जीवित हैं। कहते हैं कि जामवन्तजी बहुत ही विद्वान् हैं।  वेद उपनिषद् उन्हें कण्ठस्थ हैं। वह निरन्तर पढ़ा ही करते थे और इस स्वाध्यायशीलता के कारण ही उन्होंने लम्बा जीवन प्राप्त किया था। परशुराम और हनुमान के बाद जामवन्त ही एक ऐसे व्यक्ति थे जिनके ...

परम भागवत राजा अम्बरीष

#भक्त_गाथा_१                         || परम भागवत राजा अम्बरीष ||             राजर्षि अम्बरीष बड़े भाग्यवान् थे। वे मनुके प्रपौत्र तथा नाभागके पुत्र थे। पृथ्वीके सातों द्वीप, अचल सम्पत्ति एवं अतुलनीय ऐश्वर्य उनको प्राप्त था। यद्यपि ये सब साधारण मनुष्योंके लिये अत्यन्त दुर्लभ वस्तुएँ हैं, फिर भी वे इन्हें स्वप्नतुल्य समझते थे; क्योंकि वे जानते थे कि जिस धन-वैभवके लोभमें पड़कर मनुष्य घोर नरकमें जाता है, वह केवल चार दिनकी चाँदनी है। भगवान् श्रीकृष्णमें और उनके भक्तोंमें उनका परम प्रेम था। उस प्रेमके प्राप्त हो जानेपर तो यह सम्पूर्ण विश्व और उसकी सारी सम्पत्तियाँ मिट्टीके ढेलेके समान जान पड़ती हैं। अम्बरीषके पैर भगवान्‌के तीर्थोकी पैदल यात्रा करनेमें ही लगे रहते। उन्होंने अपने सारे कर्म सर्वात्मा एवं सर्वान्तरयामी भगवान्‌के प्रति समर्पित कर दिये थे और भगवद्भक्त ब्राह्मणोंकी आज्ञानुसार वे इस पृथ्वीका राज्य करते थे। इनकी प्रजा भी भगवद्भावभावित होकर भगवान्‌के उत्तम चरित्रोंका श्रवण तथा गायन करती। प्रजाजनो...